टिप्पणी ले लो, टिप्पणी
सस्ती और बढिया टिप्पणी ले लो
ब्लॉग लिखते लिखते अवस्थी जी चिल्लाये-
बहादुर,ज़रा जा के रोक इसको, मैं आ रहा हूँ
शाब, वो अगली कोठी के बहार खड़ा हुआ है, शर्माजी उससे कुछ खरीद रहे हैं.
अबे मरवा दिया, टिप्पणियां वैसे ही मार्केट में शोर्ट सप्लाई में हैं, ऊपर से शर्माजी,
एक नहीं छोडेंगे. जाकर फ़टाफ़ट बुला उसको.
लो शाब आ गया है वो, माल काफ़ी है उसके पास.
हाँ भाई बता कौन कौन सी टिप्पणी बची है तेरे पास, उससे पहले ये बता पड़ोस में शर्माजी ने कौन सी टिप्पणी ली है.
अरे क्या बताऊँ साब कह रहे थे साधारण लेख के लिए बढिया टिप्पणी दे दे. दाम भी साधारण लेख के.ऐसे कोई बढिया टिप्पणी मिलती है. आप बताओ आपको क्या चाहिए? जल्दी बताओ,माल वैसे ही पीछे से कम आ रहा है.
भाई, लेख तो अपने पास भी ऐसे वैसे ही हैं,पर जेब में दाम अच्छे हैं.पर एक बात तो बता,अच्छे लेख वाले तो अच्छी टिप्पणी के बहुत कम पैसे देते होंगे,क्यों की उन्हें तो वो अपने आप मिल जाती है. बेटे! तुम्हारी दुकानदारी तो हम जैसे लेखकों से ही है.
साब ,बात तो आप ठीक ही कह रहे हो.अच्छे लेखक तो एक के साथ एक मुफ्त भी मांगते हैं. और तो और, सांप्रदायिक लेख वाले तो खरीदना तो दूर, टिप्पणियां उलटे हमें बेचने की बात करते हैं.कहते हैं थोक में आती हैं, हमें क्या फिकर है, कल ऐसा ही भडकाऊ लेख और पेश कर देंगे और ढेर के ढेर टिप्पणियां और आ जाएँगी .
तो,उनसे सस्ती खरीद कर सस्ती हमें सस्ते रेट पर दिला दो.
साब वो टिप्पणियाँ अलग किस्म की होती हैं, आपके काम की नहीं हैं,फिर भी कल पूछ कर बताऊंगा.साब आप अच्छे लेख क्यों नहीं लिखते, जिससे मैं आपको सस्ता माल दे दूँ.
अबे भाग जा यहाँ से, अच्छे लेख लिख सकते तो तेरे को बुलाते ही क्यों .
साब,जी जैसी आपकी इच्छा. मुझे माल निकलना है,और ऐसे वैसे लेख लिखने वाले मेरा बेसब्री से इंतजार कर रहे होंगे.राम राम साब.
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